लेखक · व्यंग्यकार · आलोचक · फ़िल्मकार हिंदी साहित्य · 2017 से
समकालीन हिंदी कथा-संसार की एक भरोसेमंद आवाज़

बालेन्दुद्विवेदी

मैं केवल मैं हूँ — मैं जीता-जागता, चलता-फिरता व्यंग्य हूँ।

'मदारीपुर जंक्शन', 'वाया फुरसतगंज' और 'बादशाह सलामत हाज़िर हों..!' के रचयिता — श्रीलाल शुक्ल की 'राग दरबारी' परंपरा को नया समकाल देने वाले उपन्यासकार, और एक पुरस्कृत लेखक-निर्देशक।

बालेन्दु द्विवेदी / Balendu Dwivedi
बालेन्दु द्विवेदी
8
प्रकाशित कृतियाँ
14
आगामी कृतियाँ
6
साहित्यिक सम्मान
5
फ़िल्में
परिचय

लेखक के बारे में

जन्म 1975 · गोरखपुर
बालेन्दु द्विवेदी, लेखक का चित्र / Portrait of author Balendu Dwivedi
जन्म
1 दिसंबर 1975 · ब्रह्मपुर, गोरखपुर, उ.प्र.
विधाएँ
उपन्यास · नाटक · आलोचना · संपादन · यात्रा-संस्मरण · सिनेमा
परंपरा
राग दरबारी शैली का समकालीन व्यंग्य
निवास
लखनऊ, उत्तर प्रदेश

बालेन्दु द्विवेदी समकालीन हिंदी के एक सशक्त और बहुआयामी रचनाकार हैं। 1 दिसंबर 1975 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर ज़िले के ब्रह्मपुर गाँव में जन्मे बालेन्दु की रचनाशीलता की जड़ें उसी गँवई मिट्टी में हैं, जो आगे चलकर उनके कथा-संसार का सबसे जीवंत रंगमंच बनी। दर्शनशास्त्र और हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त बालेन्दु वर्तमान में उत्तर प्रदेश शासन की प्रशासनिक सेवा में कार्यरत हैं। श्रीलाल शुक्ल की तरह नौकरशाही के भीतर रहते हुए उसी तंत्र और समाज पर पैनी निगाह रखना उनके लेखन का एक विशिष्ट तेवर है।

उनके पहले उपन्यास 'मदारीपुर जंक्शन' ने उन्हें हिंदी कथा-संसार में एक भरोसेमंद आवाज़ के रूप में स्थापित किया। पूर्वी उत्तर प्रदेश के गाँव-कस्बों की जाति, सत्ता और सामाजिक विषमता को व्यंग्य और करुणा के दुर्लभ संतुलन के साथ चित्रित करने वाला यह उपन्यास 'राग दरबारी' की परंपरा में बहुप्रशंसित हुआ। इसके बाद 'वाया फुरसतगंज' और 'बादशाह सलामत हाज़िर हों..!' जैसे उपन्यासों तथा 'मृत्युभोज' जैसे नाटक ने उनकी इस पहचान को और गहरा किया।

गाँव की बोली से लेकर उर्दू की नज़ाकत तक फैली उनकी भाषा, और व्यंग्य के नीचे बहती गहरी मानवीय करुणा उनके लेखन की सबसे बड़ी ताक़त है।

उनकी लेखनी किसी एक विधा तक सीमित नहीं — उपन्यास, कहानी, नाटक, आलोचना, यात्रा-संस्मरण और जीवनी सभी में उनका विपुल लेखन है। एक ओर वे प्रेमचंद और मंटो की कहानियों का संपादन करते हैं, तो दूसरी ओर फ़ैज़, फ़राज़ और जौन एलिया जैसे शायरों पर आलोचनात्मक जीवनियाँ रचते हैं। फ़िलहाल वे लखनऊ में रहते हैं और 'मदारीपुर' त्रयी सहित कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर सक्रिय रूप से कार्यरत हैं।

कृतियाँ

प्रकाशित पुस्तकें

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शीघ्र आ रही हैं
आगामी कृतियाँ

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14 शीर्षक
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